पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने गुरुवार को इंडियन वुमेन्स प्रेस कॉर्प्स (आईडब्ल्यूपीसी) में आयोजित संवादात्मक सत्र में कहा कि शासन, पत्रकारिता और आम जीवन का आधार करुणा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी देश की वास्तविक प्रगति इस बात से तय होती है कि वह अपने सबसे कमजोर और असहाय लोगों व जीवों के साथ कैसा व्यवहार करता है।
उन्होंने कहा, “किसी देश की महानता उसकी अर्थव्यवस्था से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह उन लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है जो खुद को बचा नहीं सकते।”
सम्राट अशोक और महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास उन नेताओं को याद रखता है जिन्होंने शक्ति नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता को महत्व दिया। मेनका गांधी ने महिला पत्रकारों से आग्रह किया कि वे हर सप्ताह पेड़ों की कटाई या पशु कल्याण से जुड़े किसी विषय पर कम से कम एक स्टोरी लिखें। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि उसके जाने के बाद दुनिया पहले से “थोड़ी बेहतर और थोड़ी अधिक दयालु” बनी या नहीं।
उन्होंने कहा कि हर बड़ा सामाजिक परिवर्तन छोटे-छोटे प्रयासों से शुरू होता है। युवा पीढ़ी में निवेश के सवाल पर उन्होंने कहा कि बदलाव की शुरुआत वयस्कों से होनी चाहिए, क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता और समाज से सीखते हैं।
पशु कल्याण के क्षेत्र में अपने प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यूजीसी के माध्यम से विश्वविद्यालयों में एनिमल वेलफेयर बोर्ड गठित कराने की पहल की गई। उन्होंने वाहनों पर “Be Kind to Animals” स्टिकर लगाने के प्रस्ताव का भी जिक्र किया।
पशु कल्याण कानूनों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से पालतू जानवरों की खरीद-बिक्री पर रोक के बावजूद कई पेट शॉप्स अब भी संचालित हो रही हैं। उन्होंने हाउसिंग सोसायटियों में पालतू पशु पालने वालों के अधिकारों और अवैध पालतू पशु व्यापार का भी मुद्दा उठाया।
पर्यावरण संरक्षण पर उन्होंने कहा कि अनियंत्रित विकास प्रकृति को अपूरणीय क्षति पहुंचा रहा है। सजावटी मछलियों के व्यापार के लिए कोरल रीफ नष्ट किए जाने की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण, सतत विकास के अभिन्न अंग हैं।
संवाद के दौरान मेनका गांधी ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन, वन्यजीव संरक्षण, पशु कल्याण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, नागरिकों की जिम्मेदारियों और जनजागरूकता बढ़ाने में मीडिया की भूमिका पर भी विस्तार से अपने विचार साझा किए।
समापन में उन्होंने कहा कि करुणा केवल एक भावना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति, संस्था और सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “हर बड़ा आंदोलन एक छोटे आंदोलन से ही शुरू होता है,” और लोगों से दयालुता को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।